
मोबाइल टावरों से रेडिएशन और कैंसर का डर: सारांश
मोबाइल टावरों से निकलने वाली रेडियो फ्रीक्वेंसी तरंगों (RF-EMF) के कारण कैंसर या अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा होने की अफवाहें लंबे समय से फैली हुई हैं, लेकिन भारत सरकार और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसे पूरी तरह बेबुनियाद बताया है। मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
- सरकार का स्पष्ट स्टैंड
दूरसंचार विभाग (DoT) ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर जानकारी दी कि मोबाइल टावरों से निकलने वाली रेडिएशन तय मानकों के अंदर है और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक नहीं। EMF (इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड) प्राकृतिक रूप से भी मौजूद है (जैसे सूरज, पृथ्वी से)। टावर और फोन कम पावर पर काम करते हैं, इसलिए रेडिएशन स्तर बहुत कम रहता है। - भारत के सख्त मानक
2008 से भारत ने ICNIRP (अंतरराष्ट्रीय गाइडलाइंस) से 10 गुना कड़े नियम अपनाए हैं। भारत में सुरक्षित सीमा WHO/ICNIRP की सुझाई गई सीमा का सिर्फ 1/10वां हिस्सा है। अगर कोई टावर मानक से ज्यादा रेडिएशन फैलाता है, तो भारी जुर्माना या बंदी की कार्रवाई होती है। - WHO का वैज्ञानिक निष्कर्ष
WHO ने 25,000 से ज्यादा शोधों की समीक्षा के बाद कहा कि बेस स्टेशन (टावर) और वायरलेस नेटवर्क से निकलने वाली कमजोर RF तरंगों से स्वास्थ्य पर कोई ठोस नुकसान का प्रमाण नहीं मिला। 5G को लेकर भी यही दोहराया गया है – कैंसर या अन्य बीमारियों का कोई साबित खतरा नहीं।
कुल मिलाकर, वैज्ञानिक अध्ययन और सरकारी मानक यह पुष्टि करते हैं कि मोबाइल टावरों से रेडिएशन का डर निराधार है। यह गैर-आयोनाइजिंग रेडिएशन है, जो डीएनए को नुकसान नहीं पहुंचाता। DoT की वेबसाइट और Tarang Sanchar पोर्टल पर टावरों की रेडिएशन जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है।